मेरे जीवन साथी


गुज़र गया चाहे कितना ही ज़माना ।
आज भी मुझे भाता तेरा रोज़ मुस्कराना ।
बुने थे सपने जितने मैंने पूरे कर दिए तूने सारे ।
ज़िंदगी के कोरे पन्ने भरे मैंने तेरे सहारे ।
सुख दुख में तू मेरे साथ चली है ।
तेरे साथ सुबह हुई तेरे साथ शाम ढली है ।
आज भी लगती तू मुझे खिलती कली है ।
धूप छांव है जीवन का हिस्सा ।
पर हर मुसीबत में मुझे तुझसे ताक़त मिली है ।
भटका हूँ मैं जब भी राह से तेरे साथ मुझे मंज़िल मिली है ।
मुझे नहीं पता मुझे जीवन से क्या मिला है ।
तेरा साथ है तो किसी से ना कोई गिला है ।
खुदा से माँगता हूँ बस यही दुआ । जन्म -जन्म रहे तू साथ मेरे ।
कभी ना हो तू मुझ से जुदा ।

-सुनील गोयल



विविध कविता