छक्का


मैं मुंह नहीं खोलूँगा ।
मैं बिना इशारे कुछ नहीं बोलूँगा ।
कुछ लोग कहें पंथ प्रधान हूँ मैं ।
कुछ लोग कहें भ्रष्टाचार की कमान हूँ ।
मेरे लोग कहें देश की शान हूँ मैं ।
मेडम कहें उनका अभिमान हूँ मैं ।
पर जनता क्या कहे इस बात से अंजान हूँ मैं।

मैं मुंह नहीं खोलूँगा बिना इशारे कुछ नहीं बोलूँगा ..

-सुनील गोयल



विविध कविता