आगे बढ़


रोशनी अंधेरों के लिए है, उजालों के लिए नहीं।
ज़िन्दगी काम के लिए है, सवालों के लिए नहीं।
हाथ पे हाथ रखकर मत बैठ आगे बढ़, दुनिया पैसे वालों की है, कंगालों की नहीं।

रात के अंधेरे से कुछ सीख! जो अपने में कितनी बुराइयाँ छुपाता है ।
फिर भी जग को आराम की नींद सुलाता है।

ये दुनिया का मेला है, इस भीड़ में तू अकेला है ।
पर जो सबको साथ लेके चला उसने ही जानी जीने की कला ।
जो अंधविश्वास में पला, उसको सबने है द्दला ।

रख अपने पे भरोसा, मंज़िल दूर नहीं।
जब सामने हो कामयाबी तो तू किसी के आगे मजबूर नहीं।

रख ध्यान इतना सफलता का हो तुझे कभी गुरूर नहीं।
जिंदगी को जी ऐसे आता रहे धीरे धीरे गुरूर यहीं।