कहाँ है महंगाई


कहाँ है महँगाई कहाँ है महँगाई ।
चारों तरफ है पैसे की तबाही ।
लोग कहते हैं यह हैं इनकी काली कमाई ।
हमने तो दो वक्त की रोटी मुश्किल से है पाई ।

लाखों की गाड़ी करोड़ों की शादी ।
चारों तरफ हो रही पैसे की बरबादी ।
लोग कहते हैं यह चन्द लोगों की आबादी ।
हमने तो कुद्द रुपयों के लिए उम्र बिता दी ।

लाखों की दुकान करोड़ों के मकान ।
ज़मीन के भाव छू रहे आसमान ।
लोग कहते हैं कुछ लोगों का घमासान ।
हम तो एक झोपड़ी के लिए रहे उम्र भर परेशान ।

लाखों के पैकेज करोड़ों के पाँच सितारा अस्पताल ।
डॉक्टर हो रहा है मालामाल ।
लोग कहते हैं यह है चंद लोगों का धमाल ।
आम आदमी के लिए खस्ता हाल सरकारी अस्पताल ।

-सुनील गोयल



विविध कविता