पिगासस


श्रीमति जी ने श्रीमानजी को खबर एक सुनाई,
हवा इसकी डगर - डगर थी छाई ।

अजी, सुनते हो एक नया वायरस आया है
जिसने आतंक मचाया है,
लोगों के फोन पर यह करता है वार,
तुम किसी संदिग्ध संदेश को न खोल बैठना अगली बार !
अन्यथा यह बन सकता है जासूस,
तुम्हारा फ़ोन होगा जिसकी आंख और कान।

श्रीमानजी तनिक मुस्कराए
और पत्नी पर कुछ सवालों के तीर चलाए,
भागवान ! वॉट्स ऐप, फेसबुक, और यूट्यूब तो तुम चलाती हो,
इनकी इनक्रिप्शन के बावजूद,
कुकी और फीड्स के जाल में फ़स जाती हो।

जब तुम तीर से ही करी जा सकती हो धराशाही ,
तो पिगासस, जो ठहरा ब्रहमास्त्र, उससे क्यू घबराईं ?

पत्नी के तेवर देख,
श्रीमान‌जी को परिस्थिती का आया ध्यान,
बोले, वैसे तो मैं भी यूट्यूब और वाट्स ऐप से लेता हूँ निदान ।

समझो भागवान,
हम हैं आम इंसान,
हमें आहत करने के लिए, नहीं चाहिए पिगासस सा महान ।
हम तो आज भी रोटी, पानी, छत के लिए लड़ रहें हैं,
टी०बी०, डेन्गू, मलेरिया से मर रहे हैं।
ऐसे में, उच्च विचारों का आदान-प्रदान,
वे ही करें जो हैं प्रधान !