तन्हा


तन्हा है आज, तन्हा था कल, बड़ा मुश्किल में है जीवन का हर पल ।
पैसे से खुशी मिलती नहीं, बिना चिंगारी आग जलती नहीं ।
नींद में देख लो सपने कितने भी बिन सहारे हकीकत बनती नहीं ।
वो छोड़ कर चला गया बिन ये सोचे, हर पल की सौगात बार बार मिलती नहीं ।
मुझे खुदा बनना कुबूल ना हुआ क्योंकि इसमे ज़िंदगी की हकीकत मिलती नहीं ।

-सुनील गोयल



विविध कविता