ज़िंदगी


वो ज़िंदगी से था बड़ा ।
वो तूफ़ान से था लड़ा ।
थी उसकी नज़र गहरी ।
था वो उस रात का प्रहरि ।
रातों को था उसने जगाया ।
शामों को था उसने सुलाया ।
ज़िंदगी को मधुर बनाने के लिए प्यार का गीत गाया ।
उसे मौत से थी बड़ी नफ़रत ।
ज़िंदगी को गले लगाने की थी उसकी हसरत ।
वो अपनी हसरत में नाकाम हो गया ।
वो ज़िंदगी को गले लगाते-लगाते मौत का हो गया ।

-सुनील गोयल



विविध कविता