ज़िंदगी

वो ज़िंदगी से था बड़ा । वो तूफ़ान से था लड़ा । थी उसकी नज़र गहरी । था वो उस रात का प्रहरि । रातों को था उसने जगाया । शामों को था उसने सुलाया । ज़िंदगी को मधुर बनाने के लिए प्यार का गीत गाया । उसे मौत से थी बड़ी नफ़रत । ज़िंदगी को गले लगाने की थी उसकी हसरत । वो अपनी हसरत में नाकाम हो गया । वो ज़िंदगी को गले लगाते-लगाते मौत का हो गया ।