चुनाव


देखो चुनाव की आई बहार है ।
नए नए नेताओं का हुआ धरती पर अवतार है ।
कोई चला रहा है साइकिल तो कोई हाथी पर सवार है ।
किसी के हाथ में है कमल कोई दिखा रहा सबको हाथ है ।
राजनीति अब बन गई कारोबार है ।
देखो चुनाव की आई बहार है ।
नए नए नेताओं का हुआ धरती पर अवतार है ।

बेरोजगारी का होगा अंत, नौकरी मिलेगी तुरंत ।
गैस सब्सिडी नहीं होगी काफी , सारे कर्जों से दे देंगे माफी ।
भ्रष्टाचार का न होगा बोलबाला , न होने देंगे कोई बाद घोटाला ।
जीवन बना देंगे सबका निराला ।
किसानों को मिलेंगे फसल के पूरे दाम ,महंगाई पे लग जाएगा पूरी तरह लगाम ।
न काम करने वालों के भी अच्छे दिन आएंगे ,हर एक के खाते में बहत्तर हजार पहुचाएंगे ।
आरक्षण का दायरा इतना बढ़ेगा , देश के हर एक व्यक्ति को उसका लाभ मिलेगा ।
आधी आबादी को मिलेगा अपना पूरा अधिकार ।
चारों तरफ होगी उनकी जय-जयकार ।
नौकरी के लिए नहीं जाना होगा सात समुंदर पार ।
सारी दुनिया आएगी अब हमारे द्वार ।
ऐसे न जाने कितने वादों की है भरमार ।
देखो चुनाव की आई बहार है ।
नए नए नेताओं का हुआ धरती पर अवतार है ।

शराब और नोट उनसे खीच रहें है वोट ।
जात और धर्म का घोल दिया जहर है ।
भाषा और क्षेत्र के नाम पे हो रहा लोगों पे कहर है ।
कुर्सी ही केवल इस चुनाव का आधार है ।
देखो चुनाव की आई बहार है ।
नए नए नेताओं का हुआ धरती पर अवतार है ।

छोटे दलों की अजब है कहानी ।
बड़े बड़े नेताओं ने इनकी कदर है जानी ।
भेज दी इनके पास वही थैली पुरानी ।
अब इनके पास सौदेबाजी के अवसर अपार हैं ।
देखो चुनाव की आई बहार है ।
नए नए नेताओं का हुआ धरती पर अवतार है ।

-सुनील गोयल



विविध कविता